धीरूभाई अंबानी पर निबंध

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रिलायंस कंपनी के फाउंडर और महान बिजनेसमैन धीरूभाई अंबानी ने अपने जीवन में कठिन परिश्रम और मेहनत कर उस कारवां को प्राप्त किया है; जिसके लिए आज उनके नाम की बड़ी-बड़ी मिसाले दी जाती हैं। सफलता शब्द का पर्याय और अपनी जिंदगी में जीरो से जन्नत तक का सफर तय करने बाले धीरूभाई अंबानी और यहां कुछ निबंध प्रस्तुत किए हुए हैं :

धीरूभाई अंबानी पर छोटे एवं बड़े निबंध (Short and Long Essay on Dhirubhai Ambani in Hindi)

धीरूभाई अंबानी पर निबंध - Dhirubhai Ambani Eassy in Hindi

प्रथम निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना :

अपनी दूरदर्शिता, कृत साकल्प, मेहनत और लगन काम करते हुए बीसवीं सदी में जिस प्रकार उन्होंने अपनी कम्पनी के शेयर होल्डरों को लाभांश का भुगतान किया तथा इस कार्य से बड़े-बड़े व्यापारियों, धनपतियों और कुबेरों को आश्चर्यचकित कर दिया, उस उद्योगपति धीरजलाल हीरालाल अम्बानी साम्राज्य की स्थापना अलादीन के चिराग की करामात जैसी ही प्रतीत होती है।

धीरूभाई अंबानी : एक बिजनेस टायकून

धीरूभाई अम्बानी का जन्म 28 दिसम्बर 1933 को जूनागढ़ (वर्तमान गुजरात) के चोरवाड़ में हीरालाल गोर्धनभाई अम्बानी और जमनाबेन के पुत्र के रूप में हुआ था। कहा जाता है कि धीरूभाई अम्बानी ने अपने व्यवसाय की शुरुआत गिरनार की पहाड़ियों पर तीर्थयात्रियों को पकौड़े बेचकर की थी। मात्र सोलह वर्ष की अवस्था में धीरूभाई यमन चले गए। वहाँ उन्होंने ए. बेस्सि एण्ड कम्पनी में रु0 300 के वेतन पर काम शुरू किया तथा बाद में एडन बन्दरगाह पर फिल्लिंग स्टशन के प्रबन्धक के रूप में उनकी प्रोन्नति हुई।

उऩका विवाह कोकिलाबेन के साथ हुआ और उनके दो बेटे मुकेश अम्बानी और अनिल अम्बानी तथा दो बेटियाँ नीनी कोठारी और दीप्ति सल्गाओकर हैं। वर्ष 1952 में धीरूभाई भारत वापस लौट आए तथा 15,000 की पूँजी के साथ ‘रिलायंस वाणिज्यक निगम’ की शुरूआत की। इस कम्पनी का काम पॉलिस्टर के सूत का आयात तथा मसालों का निर्यात करना था।

अम्बानी के कार्य करने की शैली तथा तरीका बिलकुल अलग था। वे अपनी प्लानिंग और कठोर परश्रम पर विश्वास रखते थे तथा प्राय: कहते थे कि “बड़ा सोचो, जल्दी सोचो और आगे की सोचो” विचार पर किसी का एकाधिकार नहीं है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नया मोड़ दिया।

उन्होंने शेयर बाजार में सस्ती दर पर धन एकत्र करने का नया तरीका निकाला, जबकि अन्य कम्पनियाँ भारी ब्याज़ पर बैकों से पैसा उधार लेती थी। उन्होंने नए ढंग से धन एकत्र कर साहसपूर्वक अपनी कम्पनी के कर्ज़े उतारे । यह सब परिवर्तनीय ऋण पत्रों के माध्यम से सम्भव हो सका। ऐसा प्रयोग कभी किसी ने नहीं किया था। इस अनूठे तरीके अपनी बुद्धी चातुर्य तथा अर्थ प्रबन्धन कौशल से उनकी कम्पनियों ने आर्थिक समृद्धि अर्जित की तथा उन्होंने किसी को हानि पहुँचाए बिना उत्तरोत्तर प्रगति कर अपने को आधुनिक उद्योगपति सिद्ध कर दिया ।

वस्त्र व्यवसाय में अच्छे अवसर होने के कारण धीरूभाई ने वर्ष 1966 में अहमदाबाद के नैरोड़ा में कपड़ा मिल की शुरूआत की पॉलिस्टर के रेशों का प्रयोग कर वस्त्र का निर्माण किया गया । उऩ्होंने ‘विमल’ ब्राण्ड की शुरूआत की, जो उनके बड़े भाई रमणिक लाल अम्बानी के पुत्र विमल अम्बानी के नाम पर रखा गया था। वर्ष 1975 में विश्व बैंक के एक तकनीकी मण्डल ने रिलाइंस टेक्सटाइल निर्माण इकाई का दौरा किया तथा उसने उस समय में रिलाइंस वस्र को विकसित देशों के मानकों से भी उत्कृष्ट माना।

भारत के विभिन्न भागों से 50,000 से अधिक निवेशकों ने वर्ष 1977 में रिलाइंस के आईपीओ की सदस्यता ग्रहण की तथा धीरूभाई नें लोगों को आश्वस्त किया कि अम्बानी कम्पनी के शेयर धरक होने स उन्हें अपने निनेश पर केवल लाभ ही प्राप्त होगा। उन्होंने वस्त्र निर्माण के लिए नैरोडा में कपड़ा मिलें खरीदीं, पॉलिस्टर के लिए पतालगंज में तथा पेट्रो- केमिकल के लिए हाजीरा और गुजरात के तट पर तेलशोधक रिफाइनरी की स्थापना की।

उद्योग जगत में अनेक उल्लेखनीय योगदान के कारण वर्ष 1966, 1989 तथा 250102 में उन्हें एशिया वीक पत्रिका द्वारा एशिया के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों के रूप में प्रस्तुत किया गया। जून 1998 में व्हार्ट स्कूल, पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय द्वारा उल्लेखनीय नेतृत्व क्षमता के लिए ‘डीन पदक’ दिया गया।

नवम्बर 2000 में भारत में उनके रसायन उद्योग मे विकास के लिए केमटेक संस्था और विश्व रसायन अभियांन्त्रिकी द्वारा उन्हें सदी के मानव पुरस्कार से नवाजा गया। अगस्त , 2001 मे दि इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा सामूहिक उत्कृष्टता के लिए ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट’ से सम्मानित किया गया। एसे विख्यात अग्रद्रष्टा का 6 जुलाई 2002 को मुम्बई मे निधन हो गया।

उपसंहार :

इस महान् उद्योगपति को उद्योग जगत सदैव याद रखेगा। धीरूभाई अम्बानी की सोच केवल उद्योगपतियों को ही नहीं बल्कि सभी क्षेत्र के प्रत्याशियों को प्रेरणा प्रदान करती रहेगी, क्योंकि उनका मूलमन्त्र था – ”मुश्किलों में भी अपने लक्ष्यों को ढूँढिए औऱ आपदाओं को अवसरों में परिवर्तन कर दीजिए”।

आज आपने क्या सीखा ):-

यहां हमने आपको धीरूभाई अंबानी पर छोटे तथा बड़े निबंध उपलब्ध कराए हैं। उम्मीद करते हैं आप यह सीख गए होंगे कि इस विषय पर निबंध कैसे लिखना है। यदि हमारे द्वारा लिखे गए यह निबंध आपके लिए उपयोगी साबित हुए हैं तो अपने मित्रों के साथ SHARE करना ना भूले।

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