दशहरा पर्व पर निबंध

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दशहरा हिंदू धर्म का एक पवित्र त्योहार है जोकि प्रत्येक वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को दिन मनाया जाता है जिसे सामान्यतः विजयादशमी भी कहते हैं; इस पर्व को मनाने का मुख्य कारण यह है कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण को हराकर संपूर्ण संसार को सत्य की असत्य पर विजय का संदेश दिया था।यहां हमने दशहरा पर्व पर कुछ निबंध दिए हैं :

दशहरा पर्व पर छोटे एवं बड़े निबंध (Short and Long Essay on Dussehra festival in Hindi)

दशहरा पर्व पर निबंध - Dussehra festival Essay in Hindi

प्रथम निबंध (350 शब्द)

परिचय :

भारत एक धार्मिक देश हैं, और यहां कई त्योहार मनाएं जाते हैं।  दीपावली, होली और रक्षाबंधन की तरह दशहरा भी हमारे देश का एक प्रमुख त्योहार है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी दशहरे के त्योहार का बहुत महत्व है।

दशहरा कब, क्यों और कैसे मनाते हैं

दशहरा सामान्यतः अक्टूबर माह में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, दीवाली के बीस दिनों के बाद, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को, दशहरा मनाया जाता है।

प्राचीन काल से ही हमारे देश में, दशहरा, विजयोत्सव के रूप में मनाया जाता है क्योंकि यह त्योहार सच्चाई और अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसलिए दशहरा पर्व को विजया दशमी भी कहते हैं। दशहरा मनाने के पीछे यह मान्यता है कि, इसी दिन भगवान राम ने रावण को युद्ध में हराकर, विजय प्राप्त की थी। और मां दुर्गा ने, इसी दिन महिषासुर नामक दैत्य का संहार किया था। इसलिए इसी उपलक्ष्य में दशहरा पर्व को मनाया जाता है।

दशहरे के दिन, लोग विभिन्न प्रकार से पूजा पाठ करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक उपवास करने के बाद, लोग इस दिन मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कुछ जगहों पर, मां सरस्वती की भी पूजा करते हैं। इस दिन, शमी के पेड़ का भी पूजन किया जाता है। लोग दशहरे के दिन, अपने शस्त्रों की भी पूजा करते हैं।

दशहरे के दिन लोग अपने घरों को गेंदें के फूल और आम के पत्तों के हार और रंगोली से सजाते हैं और शाम को घर में दीयें जलाएं जाते हैं। कई शहरों में रावण दहन और रामलीला का आयोजन किया जाता है, जिसे देखने के लिए बहुत से लोग इकट्ठा होकर इस कार्यक्रम का आनंद लेते है।

उपसंहार :

हमारे देश में मनाया जाने वाला हर त्योहार बहुत खास होता है और हमें कुछ ना कुछ शिक्षा जरुर देता है। दशहरे का त्योहार भी हमें बहुत कुछ सीखाता है और हमें बुराई से दूर रहने और अच्छाई को अपनाने की सीख देता है।


द्वितीय निबंध (400 शब्द)

परिचय :

हमारे देश भारत में, साल के बस कुछ ही दिन छोड़ दिएं जाएं,  तो लगभग हर एक दिन कोई ना कोई छोटा या बड़ा त्योहार या धार्मिक उत्सव जरुर मनाया जाता है। इसीलिए भारत को दुनियां भर में, त्योहारों के देश के नाम से भी जाना जाता है। हमारे देश में मनाएं जाने वाले हर त्योहार का, कोई विशेष उद्देश्य जरुर होता है। हर त्योहार से जुड़ी कोई ना कोई कहानी भी होती है, जिसमें एक सीख छुपी हुई होती हैं। दशहरा, भी हमारे सबसे प्रमुख त्योहारों मे से एक है। जोकि देश में बहुत उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता हैं।

दशहरा मनाने का समय

दशहरा हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला, एक मुख्य त्योहार है। हिंदू केलेंडर के अनुसार दशहरा, दीपावली के बीस दिनों पहले, यानी कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को (साधारणतया अक्टूबर मास में) मनाया जाता है।

दशहरा मनाने का कारण

दशहरा को, विजयादशमी भी कहते हैं। यह त्योहार, सत्य की जीत और असत्य की हार का प्रतीक है। बरसों पहले, इसी दिन बुराई के प्रतीक, रावण तथा अच्छाई के प्रतीक भगवान श्रीराम का युद्ध हुआ था, जिसमें रावण की हार और भगवान श्रीराम की विजय हुई थी। यह भी मान्यता है कि, मां दुर्गा ने, महिषासुर नामक राक्षस से नौ दिनों तक कड़ा युद्ध किया था और, विजयादशमी के दिन ही उसका वध किया था। इसलिए बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में भी दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।

दशहरा मनाने का कार्यक्रम

भारत में, हर त्योहार को हंसी खुशी और उत्साह के साथ, पूरे विधि-विधान के साथ मनाने की परंपरा है। दशहरे के त्योहार को भी पूरे भारत में, अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। दशहरे के दिन, सुबह के समय लोग अपने घरों में पूजा पाठ करते हैं,  और घरों के मुख्य द्वार पर आम या नीम के पत्तों का तोरण और गेंदें के फूलों का हार लगाया जाता है।

दशहरे के दिन, शमी के वृक्ष का पूजन किया जाता है और शाम को, शमी के पत्तों को अपने बड़े बुजुर्गो को देकर, उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। भारत में कई जगहों पर, रावण का पुतला जलाकर, दशहरा मनाया जाता हैं और मेले तथा रामलीला का आयोजन किया जाता है। इस दिन लोग अपने शस्त्रों की पूजा भी करते हैं।

उपसंहार :

त्यौहारों की, किसी भी धर्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। त्योहार लोगों को करीब लाते हैं और हमारे जीवन में उत्साह भरते हैं। इसलिए हमें भी हर त्योहार को मिलजुल कर और प्यार से मनाना चाहिए।


तृतीय निबंध (500 शब्द)

परिचय :

हम भारतवासी बहुत भाग्यशाली हैं कि, हम उस देश में रहते हैं, जहां पर धर्म और संस्कृति का बहुत आदर और सम्मान किया जाता है। हम लोग हमारे सभी उत्सव, और त्योहारों को बड़े ही आनंद, उत्साह और उल्लास के साथ मिल जुल कर मनाते हैं। हमारा हर त्योहार, अपने आप में विविधता लिए होता है और हमें एक-दूसरे के साथ सौहार्द, स्नेह और सम्मान करने की शिक्षा देता है। दशहरा भी हमारे देश का एक मुख्य त्योहार है जो अधर्म पर धर्म की और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

हमारे देश में दशहरे का त्योहार इतनी उमंग के साथ मनाया जाता है कि, इसे देखने के लिए उत्साहित होकर, विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग हर साल भारत आते हैं। हिंदू संस्कृति में, दशहरा बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है, क्योंकि यह पर्व, साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों में से एक होता है। इसीलिए दशहरे के दिन, शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है, और किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए दशहरे का दिन बहुत उत्तम माना जाता है।

दीवाली के ठीक बीस दिन पहले दशहरे का पर्व आता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन मास के पहले दिन से लेकर नौ दिनों तक नवरात्रि होती है और दसवें दिन, दशहरे का उत्सव मनाया जाता है।

दशहरा मनाने की कहानी

दशहरे का पर्व मनाने का कारण यह है कि, इस दिन धर्म और नीति की विजय हुई थी। इसी दिन, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने, अधर्मी और दुराचारी, रावण का वध किया था और यह सिद्ध किया था कि, बुराई चाहे जितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो, उसका अंत हमेशा बुरा ही होता है और इसी दिन, मां दुर्गा ने भी चंडी का रूप धारण करके, शुंभ-निशुंभ, रक्तबीज और महिषासुर नामक असुरों के साथ, नौ दिनों तक संघर्ष करके उन सभी का संहार किया था।

इसलिए यह पर्व, शक्ति और धर्म की जय का तथा शत्रु पर पराक्रम की विजय का प्रतीक माना जाता है और इसीलिए इसे विजयादशमी का पर्व भी कहा जाता है।

दशहरे का पर्व कैसे मनाया जाता है

नौ दिनों तक माता की व्रत उपासना करने के बाद लोग दशहरे के दिन सुबह से ही पूजा पाठ में लग जाते हैं और खुब उत्साह से इस उत्सव को मनाते हैं। मां लक्ष्मीजी और मां सरस्वतीजी की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। दशहरे पर, शमी के वृक्ष की भी पूजा करते हैं और शाम को अपने से बड़ों को शमी के पत्ते देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है; क्योंकि एक पौराणिक कथा के अनुसार, अज्ञातवास पर जाते समय पांडवों ने अपने अस्त्र शस्त्र, शमी के वृक्ष पर रख दिए थे, और अज्ञातवास समाप्त होने पर, अर्जुन ने, विजयादशमी के दिन ही शमी के वृक्ष पर से अपने अस्त्र शस्त्र लेकर, उस वृक्ष की पूजा की थी।

मैसूर और कुल्लू का दशहरा, पूरे देश में प्रसिद्ध है। बंगाल में दशहरा, मां दुर्गा की उपासना का महापर्व माना जाता है। दशहरे के दिन, लोग जगह जगह पर, रावण का पुतला जलाते है और मेलों का आयोजन करते है। इन मेलों में, रामलीला का भी आयोजन किया जाता है, और रामायण की कथा का मंचन किया जाता है। जिसे लोग बहुत चाव से देखने जाते हैं।

उपसंहार :

हमारे पूर्वजों ने त्योहार केवल, हमारे मनोरंजन करने के लिए नहीं बनाएं गएं है, बल्कि हमें बहुत कुछ सीखाने के लिए बनाएं है। इसलिए हमें अपने हर त्योहार से कुछ ना कुछ सीखना चाहिए और अपने जीवन में, उन शिक्षाओं का उपयोग करना चाहिए।

आज आपने क्या सीखा ):-

यहां हमने आपको दशहरा पर छोटे तथा बड़े निबंध उपलब्ध कराए हैं। उम्मीद करते हैं आप यह सीख गए होंगे कि इस विषय पर निबंध कैसे लिखना है। यदि हमारे द्वारा लिखे गए यह निबंध आपके लिए उपयोगी साबित हुए हैं तो अपने मित्रों के साथ SHARE करना ना भूले।

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