समास की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

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प्रिय छात्रों प्रस्तुत लेख में हमने हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण टॉपिक “समास” की विस्तारपूर्वक जानकारी दी है. इस आर्टिकल में हमने आपको समास क्या है, समास कितने प्रकार के होते हैं, समास के उदाहरण (What is samas in Hindi, types of samas in Hindi, examples of samas in Hindi) इत्यादि सभी प्रश्नों का हल उपलब्ध कराया है.

समास | परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | हिंदी व्याकरण | Samas in Hindi
Samas in Hindi by multi-knowledge.com

समास क्या है (What is samas in Hindi)

अनेक शब्द जब मिलकर एक पद बन जाते हैं. तो यह समास कहलाता है अर्थात जब दो या दो से अधिक पद अपने प्रत्यय या विभक्ति को छोड़कर मिलते हैं तब उस सहयोग को समास (Samas in Hindi) कहते हैं.

समास की उपयोगिता – भाषा में समाज की उपयोगिता कई प्रकार से है

  1. समाज से भाषा में संक्षिप्तता आ जाती है.
  2. समाज के प्रयोग से भाषा में अर्थ शुद्ध उत्पन्न होता है.
  3. समाज से उच्चारण प्रक्रिया में सहजता का बोध होता है.
  4. भाषा समाज के प्रयोग से चुस्त होती है.
  5. भाषा के सौंदर्य में वृद्धि समास के प्रयोग से संभव है.

समास के भेद (Types of samas in Hindi)

पदों की प्रधानता को आधार मानकर समास को मुख्य चार भागों में विभाजित किया जाता है तथापि 6 भेद (Types of samas in Hindi) स्वीकार किए गए हैं.

  1. अव्ययीभाव समास- पहला पद प्रधान होता है.
  2. तत्पुरुष समास- दूसरा पद प्रधान होता है.
  3. द्वंद समास- दोनों पद प्रधान होते हैं.
  4. बहुव्रीहि समास- कोई भी पद प्रधान नहीं होता है.
  5. कर्मधारय समास- दोनों पद प्रधान होते हैं.
  6. दिगु समास- द्वितीय पद प्रधान होता है

नोट- “कर्मधारय समास” को तत्पुरुष का एक भेद माना गया है और “दिगु समास” को कर्मधारय का एक भेद माना गया है.


अव्ययीभाव समास (Avyayibhav samas in Hindi)

अव्ययीभाव समास का पहला पद क्रिया विशेषण अव्ययी होता है और प्रधानता प्राय: प्रथम पद की होती है. अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas in Hindi) के अंतर्गत निम्नलिखित कोटि के पद आते हैं –

  • अव्ययी शब्दों के योग से बनने वाले समास Example:  आचरण, व्यर्थ प्रतिदिन, यथासंभव इत्यादि.
  • शब्दों की द्विरुक्ति से भी अव्ययीभाव समास बनता है. Example: वन-वन, घर-घर, मंदिर-मंदिर इत्यादि.
  • द्विरुक्ति शब्दों के बीच में कभी कभी ही, आ, ओ भी प्रयुक्त होते है. Example: एका-एक, हाथों-हाथ, मन ही मन इत्यादि.

Example of Avyayibhab Samas- प्रत्यक्ष (के आगे), नीधड़क (बिना धड़के), बेफायदा (बिना फायदा के), बेलाग (बिना लाग के).


तत्पुरुष समास (Tatpurush samas in Hindi)

जिस समस्त पद में द्वितीय या अंतिम पद की प्रधानता को स्वीकारा जाता है. उसमें तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas in Hindi) होता है.

Example of Tatpurush Samas- राज भवन (राजा का भवन) उत्तर पद “भवन” प्रधान है. माखनचोर (माखन को चुराने वाला), नीतियुक्त (नीतियों से युक्त).

तत्पुरुष समास के भेद (types of Tatpurush samas)

(क) व्यतिकरण तत्पुरुष- यह वास्तव में तत्पुरुष समास होता है.

(ख) समानाधिकरण तत्पुरुष- इस समास को कर्मधारय समास कहते हैं.

समस्त पदों में जिस कारक या विभक्ति चिन्ह गायब होता है उसी के आधार पर उसका नामकरण किया जाता है. तत्पुरुष समास में प्रथम पद कारक की स्थिति में होता है. इसके निम्नलिखित भेद होते हैं-

  1. कर्म तत्पुरुष- प्रथम पद कर्मधारय की स्थिति में होता है तथा कर्म की विभक्ति “को” का लोप होता है. Example:
  • गगनचुंबी (गगन को चूमने वाला)
  • माखनचोर (माखन को चुराने वाला)
  • देशगत (देश को गत)
  • मनोहर (मन को हरने वाला)

2. करण तत्पुरुष- प्रथम पद करण कारक की स्थिति में होता है और कर्ण की विभक्ति चिन्ह “से” द्वारा “के साथ” गायब होता है. Example:

  • ईश्वरदत्त (ईश्वर द्वारा दत्त)
  • रंगभरी (रंग से भरी)
  • नीतियुक्त (नीतियों से युक्त)
  • बुद्धिजीवी (बुद्धि से जीने वाला)

3. संप्रदान तत्पुरुष- प्रथम पद संप्रदान कारक में रहता है तथा संप्रदान की विभक्ति “को” “के लिए” “निमित्त” हेतु आदि गायब होता है. Example:

  • स्वाधीनता संग्राम (स्वाधीनता के लिए संग्राम)
  • देश-प्रेम (देश के लिए प्रेम)
  • मात्रभक्ति (माता के लिए भक्ति)
  • राष्ट्रपिता (राष्ट्र के पिता)

4. अपादान तत्पुरुष- इसमें भी प्रथम पद अपादान कारक में होता है तथा अपादान कारक के विभक्ति चिन्ह “से” का गायब हो जाता है. Example:

  • धर्म विमुख (धर्म से विमुख)
  • जन्मजात (जन्म से जात)
  • मरणोत्तर (मरण से उत्तर)
  • दूरआगत (दूर से आगत)

5. संबंध तत्पुरुष- इसका पूर्व पद संबंध कारक में होता है तथा संबंध के विभक्ति चिन्ह “का” “के” “की” गायब होते हैं. Example:

  • वनमानुष (वन का मानव)
  • चरित्र-चित्रण (चरित्र का चित्रण)
  • उमा-भवन (उमा का भवन)
  • कृष्ण-निवास (कृष्णा का निवास)

6. अधिकरण तत्पुरुष- अधिकरण तत्पुरुष में पहला पद अधिकरण कारक मैं होता है तथा अधिकरण कारक का विभक्ति चिन्ह “में” या “पर” आदि का बोध होता है. Example:

  • आपबीपी (आप पर बीती)
  • नगर-बास (नगर में बास)
  • गृह-प्रवेश (गृह में प्रवेश)
  • ध्यान-मगन (ध्यान में मगन)

तत्पुरुष समास के अन्य भेद-

(क) अलुक समास- तत्पुरुष समास के जिस समास में पहले पद की विभक्ति चिन्ह का लोप नहीं होता है, उसे अलुक समास कहते हैं. जैसे- मनसिज, युधिस्टर, वाचस्पति आदि. यह सभी तत्सम शब्द है. इनमें संस्कृति के विभक्ति विद्वान हैं. दूसरे शब्दों में विभक्ति का लोप नहीं हुआ है.

Example: वॉच (वाक के) पति= वाचस्पति, मनसि (मन में)+ ज (उत्पन्न होने वाला)= मनसिज.

(ख) नञ् समास- इस समाज में शब्दों के पहले निषेधात्मक अथवा अभावात्मक उपसर्ग अन, अ का प्रयोग किया जाता है.

Example: अनाचार (अन+ आचार)

(ग) उपपद समास- इस समाज का उत्तर पर एक कृदंत होता है जिसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं किया जाता.

Example: घुड़सवार (घोड़े पर सवार {चढ़ने} होने वाला).


द्वंद समास (Dvand samas in Hindi)

द्वंद समास में दोनों ही पद प्रधान होते हैं और समस्त पद में दोनों पद संज्ञा या उनका समहू होता है. स्मरणीय है कि और, वा, अथवा समुच्चयबोधक का लोप रहता है. इस समुच्चय बोधक के द्वारा दोनों पद जुड़े रहते हैं. द्वंद समास (Dvand Samas in Hindi) के सामान्यतः निम्नलिखित भेद होते हैं.

(क) इतरेतर द्वंद- इसके समस्त पदों के बीच “और” समुच्चयबोधक का लोप होता है.

Example: माता- पिता (माता और पिता), सीता- राम (सीता और राम), देवर-भाभी (देवर और भाभी)

(ख) समाहार द्वंद- समाहार द्वंद्व में समस्त पद अपने अर्थ के अलावा उसी रूप के अन्य अर्थ का भी आभास देता है.

Example: नमक- रोटी (नमक और रोटी के अतिरिक्त और भी उसी कोटि की खाद्य सामग्री)

(ग) वैकल्पिक द्वंद- वैकल्पिक द्वंद्व में दोनों पदों के मध्य ” थ” और ” अथवा” समुच्चयबोधक का लोप होता है. इसके समस्त पद में साधारण ता दो परस्पर विरोधी शब्दों का योग होता है.

Example: मान- अपमान, धर्म- अधर्म, ज्ञान- अज्ञान इत्यादि.


बहुव्रीहि समास (Bahvihri samas in Hindi)

बहुव्रीहि समास, जिसमें दोनों ही पद अप्रधान होते हैं. उसमें एक नए अर्थ का संकेत मिलता है बहुव्रीहि समास (Bahvihri samas in Hindi) को कहते हैं.

Example of Bahvihri samas: चंद्रशेखर (चंद्रमा है शिखर पर जिसके अर्थात शंकर), चतुर्भुज (चार है भुजाएं जिसकी अर्थात विष्णु) इत्यादि.

बहुव्रीहि समास के भेद (Types of Bahvihri samas)

बहुव्रीहि समास के निम्नलिखित भेद इस प्रकार हैं-

(क) समानाधिकरण बहुव्रीहि- ऐसे समस्त पद हमें मैं एक ही विभक्ति आती है जैसे- दशानन, नीलकंठ, सिरकटा इत्यादि.

(ख) व्यतिकरण बहुव्रीहि- इसमें पदों में भिन्न-भिन्न विभक्तिया आती हैं जैसे- चंद्रमौली, चंद्रशेखर इत्यादि.

(ग) तुल्ययोग्य बहुव्रीहि- ऐसे समस्त पद का प्रथम पद ‘स’ होता है जिसका अभिप्राय ‘साथ’ या ‘सह’ होता है. जैसे- सब परिवार (परिवार के साथ), सफल, सहर्ष, सचेत, सार्थक इत्यादि.

(घ) कर्मव्यतीहार बहुव्रीहि- यह समास ऐसे समस्त पदों में होता है, जो जिस चीज से लड़ाई लड़ी जाए उसकी द्वीरुकती से बनता है. जैसे- बाता बाती (बात के प्रति बात कहकर जो लड़ाई लड़ी जाए वह लड़ाई), खींचातानी इत्यादि.

(घ) प्रदि बहुव्रीहि- ‘प्र’ आदि उपसर्गों के योग से बनने वाले समाज को अपराध बहुव्रीहि समास कहते हैं जैसे- कुरूप (कुत्सित है रूप वह जिसका), निर्णय इत्यादि.


कर्मधारय समास (Karmadharaya samas in Hindi)

कर्मधारय समास में दोनों पद प्रधान होते हैं. इस के पदों में विशेष्य- विशेषण, विशेषज्ञ- विशेषण, उपमान-अपमेय का भाव होता है. वहां कर्मधारय समास (Karmadharaya samas in Hindi) होता है.

Example of karmadharaya samas : शशि मुख, नीलांबर, पीतांबर इत्यादि.

कर्मधारय समास के भेद (Types of Karmadharaya samas)

कर्मधारय समास दो प्रकार की होते हैं-

  1. विशेषता वाचक
  2. उपमान वाचक

दिगु समास (Digu samas in Hindi)

दिगु समास कर्मधारय समास का एक भेद है. इस समाज में पहला पद संख्या बोधक होता है और द्वितीय पद प्रधान होता है. संख्या वाची शब्द समुदाय के अर्थ में प्रयुक्त होता है.

Example of digu samas: नवरत्न (नवरत्न का समय), अष्टाध्याई (8 अध्याय का समाहार), तिमाही, त्रिकाल इत्यादि.


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