रस की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

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Ras in Hindi: काव्य सौंदर्य के तत्वों में रस बहुत महत्वपूर्ण योगदान रखते हैं यदि किसी कविता में रस ना हो तो वह व्यर्थ है, प्रस्तुत लेख में रस की परिभाषा, रस के प्रकार एवं रस के उदाहरण (what is ras in Hindi, Types of ras in Hindi and Example of Ras in Hindi) अच्छे से संक्षिप्त रूप में दिए हैं. 

जिस प्रकार स्त्री की शोभा गहने बढ़ाते हैं उसी प्रकार कविता की सुंदरता और शोभा रस बढ़ाते हुए. तो आइए रस (Ras in Hindi grammar) के बारे में विस्तारपूर्वक पढ़ते हैं.

Ras in Hindi by Multi-knowledge.com
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What is Ras in Hindi (रस क्या है)

रस का सही शाब्दिक अर्थ- आनंद होता है अर्थात किसी कविता को सुनने से श्रोता को, मनमोहक दृश्य देखकर दर्शक को तथा किसी मनोरंजन या पसंदीदा लेख को पढ़ने पर पाठक को जो आनंद प्राप्त होता है उसे ही रस कहते हैं.

दूसरे शब्दों में – “काफी को पढ़नी है सुनने से जो आनंद प्राप्त होता है, उसे ही रस कहते हैं”. रस को काव्य की आत्मा भी कहते हैं. बहुत से लोगों ने रस की अलग-अलग परिभाषाएं दी हैं-

आचार्य भरतमुनि के अनुसार – ” विभाव अनुभाव तथा व्यभिचारी भाव के सहयोग से रस की निष्पत्ति होती है”

Parts of Ras in Hindi (रस के अवयव)

मुख्य रूप से रस के चारों युग होते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं –

♦ Sthai bhav (स्थाई भाव) 

स्थाई भाव का मतलब होता है – प्रधान भाव, जो भाव मनुष्य के हृदय में सदैव स्थाई रूप से रहता है. उसे ही स्थाई भाव कहते हैं स्थाई भाव की संख्या 9 मानी गई है, परंतु बाद में आचार्य ने दो और भागों को स्थाई भाव मान लिया. इस प्रकार स्थाई भावों की संख्या कुल 11 है, जो कुछ इस प्रकार है-

स्थाई भाव रस अर्थ
रति/ प्रेम श्रंगार रस स्त्री पुरुष का प्रेम
शोक करुण रस प्रिय के वियोग में उत्पन्न शोक का भाव
निवेद शांत रस संसार के प्रति उदासीन भाव
क्रोध रौद्र रस असफलता के कारण उत्पन्न भाव
उत्साह वीर रस दया, दान, वीरता से संबंधित प्रसन्नता का भाव
हास हास्य रस वाणी एवं अंगों उत्पन्न हंसी
भय भयानक रस भयानक जीव जंतुओं को देखकर मन में उत्पन्न भाव
घृणा वीभत्स रस दूसरों की निंदा से उत्पन्न घृणा का भाव
आश्चर्य अद्भुत रस मन में आश्चर्य का भाव उत्पन्न होना
वात्सल्य वात्सल्य रस माता-पिता का संतान के प्रति प्रेम भाव
अनुराग भक्ति रस ईश्वर के प्रति उत्पन्न मन में भाव

♦ Vivhav (विभाव)

जो व्यक्ति, वस्तु, परिस्थिति आदि स्थाई भाव को जागृत करते हैं ,उन कारणों को विभाव कहते हैं. विभाव दो प्रकार के होते हैं- आलंबन विभाव, उद्दीपन विभाव

Anubhav (अनुभाव)

भाव का बोध कराने वाले कारण तथा मानव में स्थाई भाव के जगानी पर जो शारीरिक कार्य होते हैं अथवा दिखाई देते हैं उन्हें अनुभव कहते हैं. उदाहरण0- भेड़िए को देखकर भय से कांपना या बचाव के लिए जोर-जोर चिल्लाना.

♦ Sanchari bhav (संचारी भाव)

आश्रय के मन में उत्पन्न होने वाले आस्थिर मनोविकार को संचारी भाव कहते हैं. भरतमुनि के अनुसार, यह पानी में उठने और अपने आप विलीन होने वाले बुलबुलों की तरह हैं. आचार्य ने संचारी भावों की संख्या 33 मानी है.

(1) हर्ष (2) विषाद (3) त्रास (भय/व्यग्रता) (4) लज्जा (5) ग्लानि (6) चिंता (7) शंका (8) असूया (दूसरे के उत्कर्ष के प्रति असहिष्णुता) (9) अमर्ष (विरोधी का अपकार करने की अक्षमता से उत्पत्र दुःख) (10) मोह (11) गर्व (12) उत्सुकता (13) उग्रता (14) चपलता (15) दीनता (16) जड़ता (17) आवेग (18) निर्वेद (अपने को कोसना या धिक्कारना) (19) घृति (इच्छाओं की पूर्ति, चित्त की चंचलता का अभाव) (20) मति (21) बिबोध (चैतन्य लाभ) (22) वितर्क (23) श्रम (24) आलस्य (25) निद्रा (26) स्वप्न (27) स्मृति (28) मद (29) उन्माद 30) अवहित्था (हर्ष आदि भावों को छिपाना) (31) अपस्मार (मूर्च्छा) (32) व्याधि (रोग) (33) मरण.

Types of Ras in Hindi (रस के प्रकार)

रस के प्रकारों (Types of ras in Hindi) की यदि बात की जाए तो मुख्य रूप से रस नौ प्रकार के होते हैं परन्तु वात्सल्य एवं भक्ति को भी रस माना गया हैं इसलिए इनकी संख्या 11 मानी गई है-

  1. श्रृंगार रस (Shringar Ras in Hindi)
  2. हास्य रस (Hasya Ras in Hindi)
  3. रौद्र रस  (Raudra Ras in Hindi)
  4. करुण रस (Karun Ras in Hindi)
  5. वीर रस (Veer Ras in Hindi)
  6. अद्भुत रस (Adbhut Ras in Hindi)
  7. वीभत्स रस (Veebhats Ras in Hindi)
  8. भयानक रस (Bhayanak Ras in Hindi)
  9. शांत रस (Shant Ras in Hindi)
  10. वात्सल्य रस (Vatsalya Ras in Hindi)
  11. भक्ति रस (Bhakti Ras in Hindi)

Shrangaar Ras (श्रंगार रस)

नायक और नायिका, प्रेमी-प्रेमिका और पति एवं पत्नी जब मिलते या बिछड़ते हैं तब उनके हृदय में जो भाव उत्पन्न होता है उसे स्थाई भाव को “रति” कहते हैं और उस भाव से उत्पन्न रस को श्रृंगार रस (Shringar Ras in Hindi) कहते हैं. यह रस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- संयोग श्रृंगार, वियोग श्रृंगार.

Sanyog Shringar  (संयोग श्रृंगार)

जहां पर नायक अथवा नायिका के मिलने का वर्णन होता है वहां पर संयोग श्रृंगार होता है. Example:

बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय ।
सौंह करै, भौंहनु हँसे, देन कै नटि जाय ॥

›Beyog Shringar  (वियोग श्रृंगार)

जहां पर नायक अथवा नायिका के बिछड़ने का वर्णन किया जाता है वहां वियोग श्रृंगार होता है. Example:

दरद कि मारी वन-वन डोलू वैध मिला नाहि कोई ।
मीरा के प्रभु पीर मिटै, जब वैध संवलिया होई ॥

♦ Karun Ras (करुण रस) 

जब किसी प्रिय व्यक्ति एवं मनचाही वस्तु के नष्ट हो जाने या उसे कोई आघात हो जाने पर हृदय में जो शोक उत्पन्न होता है, उसे ही करुण रस (Karun Ras in Hindi) कहते हैं. इसमें विभाव, अनुभाव, संचारी भाव तीनों के मेल से स्थाई भाव उत्पन्न होता है जिसे “शोक” कहते हैं. Example:

मेरे हृदय के हर्ष हा! अभिमन्यु से अब है कहां?
दरग खोलकर बेटा तनिक हो, देख हम सबको यहां ।
हे जीवितेश! उठो, उठो यह नींद कैसी है ।
है क्या तुम्हारे योग्य, यह तो भूमि सेज कठोर है ।।

Shaant Ras  (शांत रस)

जब इंसान को परम ज्ञान प्राप्त हो जाता है सांसारिक मोह माया और संसार की समस्त क्रियाओं को छोड़कर वैराग्य में चला जाता है और अपनी आत्मा का परमात्मा से मिलन करने के लिए वैरागी अथवा सन्यासी हो जाता है. तू उसके हृदय में जो भाव उत्पन्न होता है उस स्थाई भाव को “निवेद” या उदासीनता कहते हैं और इस कारण ही शांत रस (Shant Ras in Hindi) की उत्पत्ति होती है. Example:

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हर हैं मैं नाही ।
सब अंधियारा मिट गया,जब दीपक दीपक देखा माही ।।
लंबा मारग दूरि घर, बिकट पंथ बहु मार।
कहौ संतों क्यूं पाइए, दुर्लभ हरि दीदार॥

♦ Raudr Ras (रौद्र रस)

जब एक मनुष्य द्वारा दूसरे मनुष्य की निंदा या अपमान किया जाता है अथवा किसी व्यक्ति द्वारा अपने गुरु या सम्माननीय व्यक्ति का अनादर किया जाता है. तो उससे उत्पन्न स्थाई भाव को नाम की क्रोध कहते हैं और “क्रोध” नामक स्थाई भाव के कारण उत्पन्न रस को रौद्र रस (Raudra Ras in Hindi) कहते हैं. Example:

अतिरस बोले वचन कठोर ।
बेगि देखाउ मूढ़ नत आजू ॥
उलटउँ महि जहँ जग तवराजू॥
बोरौ,सबै रघुवंश कुठार की धार में, बारन बाजि सरत्थहिं।
बान की वायु उड़ाव कें लच्छन ,लच्छ करौं अरिहा. समरत्थहिं॥

♦ Veer Ras (वीर रस)

वीरता से संबंधित किसी चित्र को देखकर अथवा मन में जोश भर देने वाली वीरता की कविताओं या पढ़कर को सुनकर हृदय में जो स्थाई भाव उत्पन्न होता है. उस स्थाई भाव को “उत्साह” कहते हैं. इस उत्साह के कारण उत्पन्न रस को वीर रस (Veer Ras in Hindi) कहते हैं. Example:

हम हिंद के वीर सिपाही हिंदुस्तान पर जान लुटा देंगे ।
कश्मीर हिमालय की खातिर हम अपना खून बहा देंगे ॥
मैं सत्य कहता हूं सखे, सुकुमार ना जानो मुझे ।
यमराज से भी युद्ध में, सदा प्रस्तुत मानो मुझे ॥

♦ Hasay Ras (हास्य रस) 

किसी पदार्थ या किसी असाधारण व्यक्ति की असाधारण आकृति, विचित्र वेशभूषा, अनोखी बातें, और इच्छाओं से मन में जो विनोद नामक भाव उत्पन्न होता है उसे “हास” कहते हैं. यही हास नामक स्थाई भाव, विभाव, अनुभाव एवं संचारी भाव के साथ मिलकर हास्य रस (Hasya Ras in Hindi) उत्पन्न करता है. Example:

तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेम प्रताप ।
आज मिले पन्द्रह मिनट,घंटा भर आलाप ॥
स्वागत में उठ राजधानी ज्यो ।
निज कंठ लगाया, तो बे थी ठठाती ॥
होली है होली है कहेके तभी ।
शब्द भेद बताकर खूब हंसाती ॥

Bhayaanak Ras (भयानक रस )

जब किसी अत्यंत भयानक एवं अनिष्टकारी लेख को पढ़कर,दृश्य को देखकर या उसके बारे में सुनकर मानव हृदय में व्याकुलता एवं डर के रूप में जो स्थाई भाव उत्पन्न होता है उसे “भय” कहते हैं. भय नामक स्थाई भाव के कारण उत्पन्न रस भयानक रस (Bhayanak Ras in Hindi) कहलाता है. इस प्रकार के रस में पसीना छूटना, दांत तले उंगली दबाना, रूह कांपना जैसे शब्द प्रयोग किए जाते हैं. आचार्य भानुदत्त के अनुसार, ‘भय का परिपोष’ अथवा ‘सम्पूर्ण इन्द्रियों का विक्षोभ’ भयानक रस है। Example:

एक और अजगरहि लखी एक और मृगराय। बिकल बटोही बीच ही पर्यो मूरछा खाए ॥  
आज बचपन का कोमल गात, जरा का पीला पात ।
चार दिन सुखद चाँदनी रात और फिर अन्धकार, अज्ञात ॥

♦ Vibhats Ras (वीभत्स रस)

किसी घृणा पूर्ण बात को सुनकर, शर्मनाक कार्य करने वाले व्यक्ति के बारे में जानकार,किसी घृणा पूर्ण दृश्य को देखकर अथवा दूसरों की निंदा से जो घृणा या गिलानी का भाव उत्पन्न होता है. उसे “जुगुप्सा” कहते हैं .जुगुप्सा, वीभत्स रस (Vibhats Ras in Hindi) का स्थाई भाव है. मांस का सड़ना उसमें कीड़ों का पटना एवं जानवरों द्वारा उसे नोच नोच कर खाया जाना. ऐसे शब्द भी वीभत्स रस की पुष्टि करते हैं. Example:

विष्टा पूय रुधिर कच हाडाबरषइ । कबहुं उपल बहु छाडा ॥
सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत।
खींचत जीभहिं स्यार, अतिहि आनन्द उर धारत ॥
गिद्ध जाँघ कहँ खोदि-खोदि कै मांस उचारत।
श्वान अंगुरिन काटि-काटि कै खात निकारत ॥

♦ Adbhut Ras (अद्भुत रस)

जब किसी आश्चर्यजनक वस्तु या व्यक्ति को देखकर मन में जो विस्मय यह आश्चर्य का भाव उत्पन्न होता है. उसे ही अद्भुत रस कहते हैं. अद्भुत रस का स्थाई भाव “विस्मय” में होता है. बाप रे बाप ,आंखें फड़ना, गदगद हो जाना जैसे शब्द अद्भुत रस (Adbhut Ras in Hindi) की पुष्टि करते हैं. Example:

देखरावा मातहि निज ,अदभुत रूप अखण्ड ।
रोम रोम प्रति लगे ,कोटि-कोटि ब्रह्माण्ड ॥
देख यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया । 
क्षणभर को वह बनी अचेतन, हिल न सकी कोमल काया ॥

♦ Vaatsaly Ras (वात्सल्य रस )

जहां पर माता एवं पिता का बच्चों की प्रति प्रेम, बड़े भाइयों का छोटे भाइयों के प्रति प्रेम एवं गुरु का शिष्य प्रति प्रेम, स्नेह दर्शाया गया हो वहां पर वात्सल्य रस (Vatsalya Ras in Hindi) होता है. इस रस का स्थाई भाव “वात्सल्य” होता है. Example:

बाल दसा सुख निरखि जसोदा, पुनि पुनि नन्द बुलवाति ।
अंचरा-तर लै ढ़ाकी सूर, प्रभु कौ दूध पियावति ॥
जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै, दुलरावै मल्हावै, जोइ सोइ, कछु गावै ॥

♦ Bhakti Ras (भक्ति रस )

जहां पर ईश्वर के प्रति अनुराग एवं उनकी भक्ति का वर्णन किया गया हो वहां पर भक्ति रस (Bhakti Ras in Hindi) होता है किस रस का स्थाई भाव “अनुराग” होता है. Example:

एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास ।
एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास ॥
मेरि ते गिरिधर गोपाल दुसरो न कोइ । जाके सर मोर-मुकुट मेरो पति सोई ॥

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