पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

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पर्यावरण प्रदूषण, जो कि आज के समय में मानव के समक्ष एक विकराल समस्या है, इससे संपूर्ण विश्व खतरे में है; परंतु इसके बाद भी मानव अपनी जीवनशैली में सुधार करने के बजाए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन कर रहा है। इस लेख में हमने पर्यावरण प्रदूषण पर कुछ निबंध प्रस्तुत किए हैं :

पर्यावरण प्रदूषण पर छोटे एवं बड़े निबंध (Short and Long Essay on Environmental pollution in Hindi)

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध - Environmental pollution Essay in Hindi

प्रथम निबंध (300 शब्द)

प्रस्तावना :

जब हवा मिट्टी और पानी में हानिकारक तत्व मिलकर उसे दूषित कर देते हैं कि स्वास्थ्य पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है; तो इससे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण से प्राकृतिक और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है साथ ही साथ यह मानव जीवन के लिए भी बहुत हानिकारक होता है। प्रदूषण एक वैश्विक समस्या के रूप में विश्व में बढ़ते औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पूरे विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

प्रदूषण के प्रकार

वैश्विक पर्यावरण में अनेकों प्रकार के प्रदूषण पाए जाते हैं किंतु मुख्य रूप वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और मृदा प्रदूषण ज्यादा घातक खतरनाक हैं ।

वायु प्रदूषण

जब कारखानों चिमनी और वाहनों का धुआं किस में कार्बन मोनोऑक्साइड ग्रीनहाउस गैस और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैस से मिली हुई होती हैं ऐसे धोने के वायुमंडल में मिल जाने से वायु प्रदूषित होती है जिसे वायु प्रदूषण कहा जाता है इससे खसरा, टीबी, इन्फ्लूएंजा और दमा आदि जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

जल प्रदूषण

जब कारखानों के अपशिष्ट पदार्थ और घरों का गंदा पानी बहकर नदियों में चला जाता है तो इससे नदी का पानी दूषित हो जाता है जो कि जल प्रदूषण को बढ़ावा देता है और मनुष्य द्वारा इस दूषित जल का उपयोग करने से टाइफाइड, डायरिया आदि जैसी खतरनाक बीमारियां होने का खतरा रहता है।

ध्वनि प्रदूषण

मनुष्य के सुनने की क्षमता सीमित होती है। 60 डेसिबल से अधिक ध्वनि सामान्य ध्वनि से अधिक मानी जाती है जो कि मनुष्य की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाती है। जब मशीनों की तेज आवाज, लाउड म्यूजिक और तेज पटाखे की आवाज सामान्य से अधिक हो जाती है तो इसे ही ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है। इससे मनुष्य में बहरेपन के साथ-साथ चिड़चिड़ापन, पागलपन और बेचैनी जैसी समस्या भी उत्पन्न हो जाती है।

मृदा प्रदूषण

जब कृषि उद्योग में खेती करते समय अधिक उर्वरक और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है तो इससे मृदा के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ जाता है इसी को मृदा प्रदूषण कहते हैं। दूषित मृदा से उपजे अनाज मनुष्य द्वारा खाए जाते हैं जिससे उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है

उपसंहार :

तेजी से बढ़ता प्रदूषण पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन चुका है। प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष पर्यावरण दिवस, ओजोन दिवस, पृथ्वी दिवस, जल दिवस आदि भी मनाए जाते हैं। हमें विश्व के बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए अपना संभव योगदान देना चाहिए; लोगों को प्रदूषण की समस्या के प्रति जागरूक करना भी हमारा कर्तव्य है।


द्वितीय निबंध (500 शब्द)

प्रस्तावना :

पृथ्वी पर सभी जीव धारियों के स्वस्थ एवं जीवित रहने के लिए हमारे पर्यावरण का सुरक्षित एवं स्वच्छ रहना अति आवश्यक है। किंतु मानव जाति द्वारा अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण में पाए जाने वाले संसाधनों के दोहन से इसे काफी नुकसान पहुंच रहा है और हमारा पर्यावरण दूषित हो रहा है। आज पर्यावरण प्रदूषण भारत में नहीं बल्कि विश्व में एक सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिकीकरण और तकनीकी के बढ़ने कारण यह काफी मुश्किल हो रहा है।

प्रदूषण का अर्थ :

पर्यावरण में अपशिष्ट पदार्थ का इस अनुपात में मिलना, जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है प्रदूषण कहलाता है।

जल में अपशिष्ट पदार्थों का मिलना, वातावरण में जहरीली गैसों का फैलना, मिट्टी में रासायनिक उर्वरकों के रूप में खतरनाक रसायन तत्वों का मिलना एवं अत्याधिक ध्वनि उत्पन्न होना यह सभी प्रदूषण के मूल कारण हैं।

प्रदूषण के प्रकार :

प्रदूषण के मुख्य रूप हैं; जैसे- जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण इत्यादि। इन सभी के अतिरिक्त अन्य कई प्रकार जैसे – प्रकाश प्रदूषण, रासायनिक प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण आदि भी है; जिनके प्रदूषक कण बहुत छोटे किंतु खतरनाक होते हैं।

वायु प्रदूषण

सभी प्रकार के प्रदूषण में वायु प्रदूषण सबसे खतरनाक है; और यह तेजी से बढ़ रहा है लगातार वाहनों के उपयोग से यह काफी गतिशील है। वायु प्रदूषण के मुख्य कारण बड़े-बड़े कारखानों की चिमनी में से निकलने वाला धुआं, रोड पर चलन वाली गाड़ी के साइलेंसर से निकलने वाला धुआं, और वनों की कटाई हैं। जिनसे शहरी मानव जीवन बहुत प्रभावित हो रहा है ।

दिल्ली और मुंबई जैसे बड़ी शहरों में सांस लेना मुश्किल हो रहा है।  इससे अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। कई बड़े-बड़े शहरों आप रोड पर विदाउट मास्क नहीं निकल सकते हैं।

जल प्रदूषण

लगातार कारखाने और फैक्ट्रियों से बहने बाला गंदा जल एवं रासायनिक पदार्थ जल प्रदूषण का मुख्य कारण है। विज्ञान के तेजी से बढ़ने के साथ फैक्ट्री और कारखानों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा जल सीधे नदियों और समुद्र में छोड़ा जा रहा है।

शहरों से जाने वाला कचरा भी नदियों और समुद्र में फेंका जा रहा है। इससे जल प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है इससे बहुत सी बीमारियां उत्पन्न हो रही है।

ध्वनि प्रदूषण

बढ़ते हुए प्रदूषण में ध्वनि प्रदूषण एक महत्वपूर्ण कारण है। यह मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक है। ध्वनि यंत्रों के अधिक प्रयोग, सड़क पर चलने वाले वाहन की ध्वनि से यह प्रदूषण उत्पन्न हो रहा है।

आज का मानव बहुत तेज ध्वनि वाली लाउडस्पीकर, डीजे और कर्णभेदक ध्वनि के यंत्र उपयोग कर रहा है । शादी एवं अन्य कार्यक्रमों में बैंड बाजा और डीजे, फैक्ट्रियों में बड़ी-बड़ी मशीनें, खदानों में विस्पोट जैसेध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है ।

मृदा प्रदूषण

पर्यावरण प्रदूषण का मृदा प्रदूषण एक मुख्य कारण है। भूमि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसान खतरनाक रासायनिक दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं और साथ ही हम उन रसायनों से उत्पन्न सब्जियों का खाने में इस्तेमाल करते हैं और नई-नई बीमारियों को बुलावा देते हैं।  प्लास्टिक एवं कांच जिन्हें नष्ट करना मुश्किल है यह जब मिट्टी में मिलती है तो भी मृदा प्रदूषण होता है।

रेडियोएक्टिव प्रदूषण

इस प्रकार के प्रदूषण का मुख्य कारण, प्रकृति में उपस्थित कुछ ऐसे हानिकारक तत्व है; जो स्वता ही विघटित हो जाते हैं; और इनसे खतरनाक किरण अथवा कण निकलते हैं; जो जीव जंतुओं और मानक जीवन के लिए हानिकारक है।रेडियोएक्टिव प्रदूषण से अनुवांशिक उत्पन्न हो जाते हैं; जिसके कारण अपंग शिशु जन्म लेते हैं।

उपसंहार :

वस्तुतः प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है, जिससे निपटना वैश्विक स्तर पर ही संभव है किंतु इसके लिए प्रयास से स्थानीय स्तर पर भी किए जाने चाहिए विकास एवं पर्यावरण एक दूसरे के विरोधी नहीं है, अपितु एक दूसरे के पूरक हैं। संतुलित एवं शुद्ध पर्यावरण के बिना मानव का जीवन कष्ट में हो जाएगा हमारा अस्तित्व एवं जीवन की गुणवत्ता एक स्वस्थ प्राकृतिक पर्यावरण पर निर्भर है। विकास करने के साथ-साथ हमें यह ध्यान रखना होगा कि इससे पर्यावरण को कोई नुकसान ना हो।


तृतीय निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना:

आज भारत ही नहीं बल्कि, संपूर्ण विश्व एक बहुत गंभीर समस्या से जूझ रहा है और वह है, पर्यावरण प्रदूषण। पर्यावरण प्रदूषण के कारण हमारी पृथ्वी का बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है। जिसका दुष्परिणाम, मनुष्य के जीवन में भी देखा जा सकता है। मनुष्य ने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए, सृष्टि के सुंदर स्वरूप को, कुरुप कर दिया है। आज के इलेक्ट्रॉनिक युग में, मनुष्य बहुत तेजी से आगे निकलता गया, और पर्यावरण को भी उसी तेजी से खराब करता गया। तेजी बढ़ती हुई जनसंख्या, इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। यदि हम इस पर नियंत्रण कर लेते हैं तो, प्रदुषण कम करने के साथ साथ, और भी बहुत सारी समस्याओं का हल निकाल सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण क्या है ?

पर्यावरण, हमारे आसपास की संपूर्ण सृष्टि या परिसर होता है, जिसमें मनुष्य, हवा, पानी, सूर्य, पेड़ पौधे, पशु-पक्षी, जीव-जंतु, नदियां, समुद्र, पर्वत, मिट्टी, धरती, आकाश,  इत्यादि प्रकृति के सभी घटक आते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण को सामान्य शब्दों में समझें तो, पर्यावरण को, हानिकारक जैविक, भौतिक या रासायनिक पदार्थों द्वारा दूषित करने को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। अर्थात पर्यावरण को गंदा एवं हानिकारक बनाने की प्रक्रिया प्रदूषण कहलाती है और जिन पदार्थों से प्रदूषण किया जाता है उन्हें प्रदूषक कहते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार

पर्यावरण प्रदूषण कई तरह का होता है, लेकिन मुख्य रूप से, जल प्रदुषण, वायु प्रदुषण और ध्वनि प्रदुषण यह तीनों ही पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। इनके अलावा, परमाणु ऊर्जा द्वारा प्रक्षेपित हानिकारक पदार्थ, विद्युत चुम्बकीय प्रदुषण, रेडियोएक्टिव प्रदूषण इत्यादि वातावरण प्रदुषण के अन्य प्रकार है।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण

पर्यावरण प्रदूषण के कई कारण होते हैं। सबसे पहले यदि जल प्रदुषण की बात करें तो, नदियों के किनारे बने कारखाने और फेक्ट्रियां, लगातार हानिकारक विषैले रसायन नदियों में छोडती है। लोग प्लास्टिक, रबर या अन्य कूड़ा-करकट भी नदियों में प्रवाहित कर देते हैं। इन सब कारणों से, नदियों का जल प्रदुषित होता रहता है।

जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ रही है, मनुष्य जंगल के जंगल साफ कर रहा है। जिसका प्रभाव पेड़ों से मिलने वाली प्राणवायु, अॉक्सीजन की उपलब्धता पर भी पड़ता है। कारखानों से निकलने वाले और सड़कों पर, जीवाश्म ईंधन से दौड़ने वाले अनगिनत वाहनों के विषैले धुएं, से हवाओं में जानलेवा विषैले पदार्थ और जहरीली गैसें घुल कर, वायु प्रदुषण करते हैं। प्रदुषण के दुष्प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य को शारीरिक और मानसिक रूप से हानी पहुंचा रहे हैं।

टेक्नोलॉजी और बीजली का अत्यधिक उपयोग, घर में विद्युत उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता, जीवन के तौर तरीकों में बदलाव, लिटरिंग, प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़, प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकता से अधिक उपयोग, प्लास्टिक, रबर, कीटनाशक जैसे हानिकारक पदार्थों का उपयोग करना और उन्हें वातावरण में फेंक देना यह सब मिलकर हमारे वातावरण को निरंतर प्रदुषित करते हैं।

पर्यावरण प्रदुषण रोकने के उपाय

पर्यावरण प्रदुषण से बचने के लिए, सबसे पहले हमें, जल, वायु और ध्वनि के प्रदुषण को रोकना होगा। पर्यावरण प्रदूषण के भयानक परिणामों को ध्यान में रखकर हर नागरिक को इसके लिए आगे आना होगा। कुछ सरल उपाय अपनाकर, पर्यावरण को प्रदुषित होने से बचाया जा सकता है।

जल प्रदुषण से बचने के लिए, जल संसाधनों को साफ-सुथरा रखना होगा और नालियों में कूड़ा करकट इकठ्ठा ना होने देना, बेवजह पानी का दुरुपयोग करने से बचना होगा।

वायु प्रदुषण से बचने के लिए, यहां वहां थूकने की आदत को छोड़ना होगा, कारखानों से निकलने वाले धुंए को कम करना होगा, कचरा जलाने के बजाय उसे रिसायकल करना होगा, पटाखों का उपयोग कम करना होगा।

ध्वनि प्रदुषण से बचने के लिए, बेवजह शोर-शराबा और लाउडस्पीकर का उपयोग ना करें, हार्न की जरूरत ना हो तो, बेवजह ना बजाएं, पटाखों का शोर ना करें।

इसके अलावा, प्रदुषण से बचने के लिए, प्लास्टिक और रबर का उपयोग करने के बजाय इसके विकल्पों पर ध्यान दें, रासायनिक खाद के बजाय सेन्द्रिय खेती करें, अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाए और उनका संरक्षण और संवर्धन करें। और सबसे खास, बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने में योगदान दें।

उपसंहार :

पर्यावरण हम सभी के लिए सृष्टि का वरदान है, हम अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पूरी तरह से पर्यावरण पर ही निर्भर है। इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने पर्यावरण का ध्यान रखें। उसे साफ सुथरा रखें, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग समझदारी से करें और उन्हें दुषित होने से बचाएं।  यह हम सबके और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत जरुरी है। इसलिए मिलकर आगे आएं और पर्यावरण को संरक्षित करने में योगदान करें।

आज आपने क्या सीखा ):-

यहां हमने आपको पर्यावरण प्रदूषण पर छोटे तथा बड़े निबंध उपलब्ध कराए हैं। उम्मीद करते हैं आप यह सीख गए होंगे कि इस विषय पर निबंध कैसे लिखना है। यदि हमारे द्वारा लिखे गए यह निबंध आपके लिए उपयोगी साबित हुए हैं तो अपने मित्रों के साथ SHARE करना ना भूले।

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